Sukanya Samriddhi Yojana: क्या सच में बेटी की MBA फीस सुकन्या समृद्धि योजना से पूरी हो सकती है? असली कैलकुलेशन जानकर आप चौंक जाएंगे!
Sukanya Samriddhi Yojana: सुकन्या समृद्धि योजना सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न देती है, लेकिन क्या यह अकेले 20 साल बाद बेटी की महंगी MBA पढ़ाई का खर्च पूरा कर पाएगी? एजुकेशन इन्फ्लेशन को देखते हुए सिर्फ इस योजना पर निर्भर रहना पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
(Sukanya Samriddhi Yojana/ Image Credit: IBC24 News)
- सरकार समर्थित सुरक्षित निवेश योजना
- 8%+ के आसपास गारंटीड ब्याज का लाभ
- बेटी के भविष्य के लिए लॉन्ग टर्म सेविंग
नई दिल्ली: Sukanya Samriddhi Yojana: बेटी की पढ़ाई के लिए निवेश करना हर परिवार के लिए बहुत जरूरी होता है। इसी वजह से सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) काफी लोकप्रिय है। यह सरकार द्वारा समर्थित योजना है। जिसमें पैसा सुरक्षित रहने के साथ-साथ अच्छा ब्याज भी मिलता है और टैक्स छूट का भी लाभ मिलता है। लंबे समय के लिए यह एक भरोसेमंद बचत का विकल्प माना जाता है।
21 साल में कितना पैसा बन सकता है?
अगर कोई माता-पिता बेटी के जन्म के बाद हर साल 1.5 लाख रुपये इस योजना में निवेश करें तो 15 साल में कुल 22.5 लाख रुपये जमा होंगे। मौजूदा 8.2% ब्याज दर के हिसाब से यह रकम बढ़कर लगभग 44.75 लाख रुपये हो सकती है जब निवेश अवधि पूरी होगी। 21 साल की मैच्योरिटी पर यह फंड लगभग 71.82 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
MBA की बढ़ती लागत का असर
आज के समय में एक अच्छे बिजनेस कॉलेज से MBA करने में करीब 20 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं। इसमें फीस, हॉस्टल और अन्य खर्च शामिल होते हैं। लेकिन शिक्षा की लागत हर साल तेजी से बढ़ रही है। जिसे एजुकेशन इन्फ्लेशन कहा जाता है। अगर यह 10% सालाना की दर से बढ़ता रहा तो 20 साल बाद यही MBA करीब 1.48 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
SSY फंड और खर्च में अंतर
अगर भविष्य में MBA की लागत 1.48 करोड़ रुपये हो जाती है और SSY से लगभग 71.82 लाख रुपये मिलते हैं तो लगभग 76 लाख रुपये की कमी रह जाएगी। इसका मतलब है कि सिर्फ सुकन्या समृद्धि योजना के भरोसे पूरी उच्च शिक्षा का खर्च पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि SSY एक सुरक्षित और मजबूत बचत योजना है। लेकिन इसे अकेले पूरे शिक्षा लक्ष्य के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। बड़े और महंगे पढ़ाई के लिए इसके साथ दूसरे निवेश विकल्प भी अपना सकते हैं। इसके साथ म्यूचुअल फंड या इक्विटी जैसे निवेश विकल्प भी जोड़ने की सलाह दी जाती है। इससे लंबे समय में बेहतर फंड तैयार किया जा सकता है और शिक्षा के बढ़ते खर्च को आसानी से संभाला जा सकता है।
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